
सक्षम संस्था जिला इकाई खंडवा द्वारा संत सूरदास जयंती समारोह हुआ
आयोजित।
खंडवा। सक्षम जिला इकाई खंडवा द्वारा सक्षम मालवा प्रान्त के अध्यक्ष सन्तोष साबू, सचिव गोविंद नागर, कोषाध्यक्ष दिलीप सामत व सहसचिव हर्ष शर्मा के दिशानिर्देश अनुसार संत शिरोमणि भक्त कवि सूरदास जी की जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन गणेश तलाई स्थित निमाड़ अंचल नेत्रहीन संघ आश्रम में किया गया। कार्यक्रम में दिव्यांगजन, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।समाजसेवी सुनील जैन नै बताया की कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत उद्बोधन से हुआ, जिसमें सक्षम जिला अध्यक्ष नारायण बाहेती ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन अनिल बाहेती ने किया तथा अंत में जिला सचिव रविन्द्र चौहान ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में अग्रवाल समाज के अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल एवं दुबई से पधारे सभनानी जी ने अपने प्रेरणादायी विचार रखते हुए दिव्यांगजन सेवा एवं समाज में सहयोग की भावना को बढ़ाने का संदेश दिया। इस अवसर पर आश्रम के दिव्यांगजनों एवं स्टाफ को भोजन करवाया गया तथा सभी ने भोजन प्रसादी ग्रहण की।
कार्यक्रम में अध्यक्ष नारायण बाहेती, सचिव रविन्द्र चौहान, कोषाध्यक्ष राजीव शर्मा, संरक्षक योगेश कोटवाले, सुरेन्द्र सिंह सोलंकी, युवा आयाम प्रमुख रोहित पटेल, उपाध्यक्ष राजीव मालवीय, आशा उपाध्याय, अनिल बाहेती, सुनील जैन,डायरेक्टर घनश्याम वाधवा, डॉ. राधेश्याम पटेल, मदन चौधरी, विजय, उमाशंकर उपाध्याय, ममता सहित अन्य सदस्यों ने संत सूरदास जयंती एवं दिव्यांगजन सेवा विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।
निमाड़ अंचल नेत्रहीन संघ के नंदराम अवचे ने संत सूरदास जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सूरदास जी ने लगभग पचास हजार पदों की रचना की, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है।
वक्ताओं ने कहा कि सूरदास जी हिंदी साहित्य के अमर कवि थे, जिन्होंने अपनी भक्ति, प्रेम और काव्य प्रतिभा से पूरे भारत को आलोकित किया। जन्म से नेत्रहीन होने के बावजूद उन्होंने अपने हृदय की दृष्टि से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का ऐसा जीवंत चित्रण किया, जो आज भी लोगों के हृदय को स्पर्श करता है। उनका प्रसिद्ध ग्रंथ “सूरसागर” भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर है।
कार्यक्रम में उपस्थितजनों ने कहा कि सूरदास जी का जीवन हमें यह प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियाँ भी व्यक्ति की प्रतिभा और महानता को नहीं रोक सकतीं। हमें उनके प्रेम, करुणा, भक्ति और मानवता के संदेश को अपने जीवन में अपनाकर समाज में सद्भाव और संस्कारों को मजबूत बनाना चाहिए।
कार्यक्रम का समापन सूरदास जी के प्रसिद्ध पद “मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो” के गायन एवं सामूहिक भोजन प्रसादी के साथ हुआ।कार्यक्रम में विभिन्न दिव्यांग संस्थाओं के प्रतिनिधि, लायन्स क्लब खण्डवा सदस्य व गणमान्य जन उपस्थित रहे।











